आओ ज़रा वक़्त निकाल कर

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aao jara waqt nikal ke

आओ ज़रा वक़्त निकाल कर ,
इश्क़ की परिभाषा पढ़ते हैं।
आंखो के ज़रिये सवाल जवाब,
कुछ तर्क वितर्क करते हैं।।
अल्फाज़ों मे वो जुनून कहाँ
जो दिल की गहराई जता सके ।
आओ लबों से छू कर पलकों को,
आशिक़ी की मूरत गढ़ते हैं।।

हाथों में लेकर हाथ ज़रा,
आओ लम्हा वो जी लेते हैं।
तपती सिक्ती आंच पर दिल की
एक अनोखी कहनी कढ़ते हैं।।
आओ ज़रा वक़्त निकाल कर ,
इश्क़ की परिभाषा पढ़ते हैं।

कुछ हँसी ठिठोली में ही सही,
रूह की गहरी बातें करते हैं।
कभी लड़ते लड़ते हस्ते हैं तो
कभी हस्ते हस्ते लड़ते हैं।।
आंखो के जरिये सवाल जवाब,
कुछ तर्क वितर्क करते हैं।

मोहब्बत की हो हद्द ना जहाँ
वहाँ तक का सफर तय करते हैं।
आगोश में खो कर एक दूजे के,
आओ साथ-साथ इश्क़ की सीढी़ चढ़ते हैं।।
आओ ज़रा वक़्त निकाल कर ,
इश्क़ की परिभाषा पढ़ते हैं।
आंखो के जरिये सवाल जवाब,
कुछ तर्क वितर्क करते हैं।।

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